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हाल ही में काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिचर्स ऑफ इंडिया ने रिंकल अच्छे हैं कैंपेन शुरु किया है, जिसमें लोगों को मंडे के दिन बिना आयरन किए हुए कपड़े पहनने को कहा गया.

जलवायु परिवर्तन अर्थ लंबे समय से आमतौर पर दशकों से लेकर लाखों वर्षों तक पृथ्वी के क्लाइमेट पैटर्न में महत्वपूर्ण और स्थायी परिवर्तनों से है. ये परिवर्तन विभिन्न तरीकों से हो सकते हैं, जैसे तापमान में बदलाव, बारिश का पैटर्न, समुद्र के स्तर में वृद्धि और तूफान, हीटवेव और सूखे जैसी स्थिति. दिन प्रतिदिन जलवायु का स्तर खराब होता जा रहा है. ऐसे में सीएसआईआर ने एक कैंपेन शुरू किया है.!

रिंकल्स अच्छे हैं कैंपेन के बारे में जानें

कॉर्पोरेट वर्लड में ‘कैज़ुअल फ्राइडेज़’ नॉर्मल है, लेकिन कैजुअल मंडे, ये कुछ नया है. हाल ही में काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिचर्स ऑफ इंडिया ने रिंकल अच्छे हैं कैंपेन शुरु किया है, जिसमें लोगों को मंडे के दिन बिना आयरन किए हुए कपड़े पहनने को कहा गया. इस कैंपेन पर सीएसआईआर ऑफिशियल्स ने कहा कि यह पहल एनर्जी सेव करने के लिए की गई है और हफ्ते में एक बार बिना आयरन किए हुए कपड़े पहनकर काम करने से हमारे प्लैनेट को बचाने में मदद मिलेगी.

डिपार्टमेंट ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिचर्स के सेक्रेटरी और सीएसआईआर की पहली महिला डायरेक्टर जनरल डॉ. एन. कलाईसेल्वी ने बताया कि रिंकल्स अच्छे हैं (डब्ल्यूएएच) कैपेंन, मंडे एक व्यापक ऊर्जा साक्षरता पहल का हिस्सा है. इसके आगे उन्होंने बताया कि “सीएसआईआर का स्टाफ भी सोमवार को बिना आयरन किए हुए कपड़े पहनकर काम करेगा.!

इस कैंपेन से कैसे पड़ेगा असर?

कपड़ों को प्रेस करने से प्रति सेट लगभग 200 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रोड्यूस होता है इसलिए, बिना आयरन किए हुए कपड़े पहनने से कार्बन डाइऑक्साइड में काफी कमी आ सकती है.”

कब से शुरु होगा कैंपेन

यह कैंपेन ‘रिंकल्स अच्छे हैं’ 1-15 मई तक ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ के हिस्से के रूप में शुरू किया गया है. इस पर सीएसआईआर के अधिकारियों ने कहा कि यह नई पहल लोगों को जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूक करने के बारे में है. साथ ही, कैसे छोटी-छोटी चीजें इसके खिलाफ वैश्विक लड़ाई में योगदान दे सकती हैं.

सीएसआईआर के बारे में

अपने व्यापक ऊर्जा-बचत प्रयास के एक घटक के रूप में, सीएसआईआर देश भर में सभी लेबोरेटरी में बिजली के उपयोग को कम करने के लिए कई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर डेवलप कर रहा है, जिसका लक्ष्य शुरुआत में वर्क प्लेस पर बिजली के खर्च में 10% की कमी करना है. इन एसओपी का जून से अगस्त 2024 तक पायलट टेस्टिंग किया जाएगा.

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