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संदेह के आधार पर EVM पर नहीं दिया जा सकता है आदेश’, VVPAT वेरिफिकेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को इलेक्ट्रॉनिंग वोटिंग मशीन (EVM) के जरिये डाले गए सभी वोट का वीवीपैट के साथ मिलान करने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षिता रखा।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। इवीएम और वीवीपैट पर बार बार संदेश जताने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने संदेश दे दिया है कि बिना किसी तथ्य के केवल संदेह के आधार कोई फैसला नहीं दिया जा सकता है। वकील प्रशांत भूषण से कोर्ट ने कहा-आप जिस रिपोर्ट पर भरोसा कर रहे हैं वह कहती है कि अभी तक हैकिंग की कोई घटना नहीं हुई। फिर इस पर रोक का आदेश कैसे दिया जा सकता है।

वोट से VVPAT के मिलान मामले में SC ने फैसला रखा सुरक्षित

कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपैट की सुरक्षा और प्रोग्रामिंग के बारे में चुनाव आयोग से कुछ सवाल पूछे और आयोग द्वारा उनका उत्तर दिये जाने और ईवीएम वीवीपैट मशीन में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना से इन्कार किये जाने पर मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। एसोसिएशन फार डेमेक्रेटिक रिफार्मस (एडीआर) संस्था और कुछ अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम से 100 प्रतिशत मिलान की मांग की है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से बैलेट से चुनाव कराए जाने की पुरानी व्यवस्था लागू करने की भी मांग की थी हालांकि कोर्ट ने यह दलील पहले ही ठुकरा दी थी। वैसे तो कोर्ट इस मामले में बहस सुनकर पहले ही 18 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख चुका था लेकिन बुधवार को कोर्ट ने चुनाव आयोग से कुछ सवालों के जवाब जानने के लिए मामले को फिर से सुनवाई पर लगाया था।

ईवीएम और वीवीपैट मशीन में छेड़छाड़ के आरोप पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?

बुधवार को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ ने चुनाव आयोग से कुछ सवाल पूछे। चुनाव आयोग ने दोहराया कि ईवीएम और वीवीपैट मशीन में किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। आयोग ने मशीनों की सुरक्षा उन्हें सील किये जाने और उनकी प्रोग्रामिंग के संबंध में स्थिति स्पष्ट की। लेकिन इसके बाद भी जब एडीआर की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने मशीन में प्रोग्रामिंग और छेड़छाड़ की आशंका जताई तो जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि क्या सिर्फ संदेह के आधार पर कोर्ट ईवीएम के बारे में आदेश दे सकता है जबकि इसका कोई ठोस सबूत भी नहीं है।

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