
बिहारी नेताओं पर भी अब फागुन का रंग पूरी तरह से चढ़ गया है. पब्लिक पर ये रंग तो बीते कई दिनों से चढ़ा हुआ है. लेकिन, बिहार विधानसभा में बुधवार को भोजपुरी गाना ‘भर फागुन बुढ़वा देवर लागे’ वाला रंग देखने को मिला. दरअसल, बिहार विधानसभा में नशेड़ी, भंगेड़ी और न जाने टिकुली, बिंदी और क्या-क्या न शब्द का प्रयोग अचानक होने लगा. ये कोई और नहीं बल्कि बिहार के मौजूदा सीएम नीतीश कुमार और पूर्व सीएम रबड़ी देवी के बीच शुरू हुआ. इन दोनों के बीच जेडीयू नेताओं और आरजेडी नेताओं ने भी एंट्री मार ली. इस बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का अचानक ही बड़ा बयान आ गया. इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में होली का असली रंग चढ़ते नजर आने लगा.
होली से पहले आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को सीएम नीतीश कुमार पर एक बार फिर से जोरदार हमला बोला है. इस दौरान उनकी मां राबड़ी देवी भी उनके साथ पीछे खड़ी थीं. तेजस्वी यादव ने कहा, ‘ अब तो नीतीश जी पर तरस आता है और दया आती है. कामना करना पड़ रहा है कि भगवान उनके स्वास्थ्य को ठीक कर दें. सदन में वे इशारा और हरकतें करते रहते हैं, इससे लगता है कि वह अब नॉर्मल नहीं हैं. उनकी मां राबड़ी देवी की तरफ इशारा करते हैं. माथा में बिंदी क्यों नहीं लगाई? यह इशारा करते हैं. पहले भी नीतीश जी बिहार सरकार की मंत्री शीला कुमारी मंडल की बिंदी पर टीका-टिप्पणी करते थे. रबड़ी देवी से पूछते हैं कि उन्होंने बिंदी क्यों लगाई? मैं चाहता हूं कि सदन का वीडियो निकालकर देखा जाए. सदन के अंदर उनकी बोली और हरकतें साफ बताती हैं कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है.’!
होली से पहले ‘बिंदी’ पर महाभारत
तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर एक बार फिर से कई आरोप लगाए. यादव ने आरोप लगाया कि नीतीश कहते हैं कि लालू यादव को मैं सीएम बनाया. लेकिन लालू से उनका कोई कंपेरिजन नहीं है. हमारे पिता लालू यादव 1977 में ही सांसद बन गए थे. जबकि, नीतीश जी 1977 और 1985 चुनाव हारे. जब जेपी की लहर थी तब हरनौत से विधानसभा का चुनाव हारे. वो बोलते हैं कि हम निकाल दिए . जबकि, तेजस्वी यादव ने उन्हें दो बार सीएम बनाया. वह डरपोक हैं और हर बार इस्तीफा दे देते हैं. मैंने तो इस्तीफा नहीं दिया? वे किसी को हटाते नहीं हैं. फिर विधानसभा में कहते हैं कि इन्हें हटा दिए, जबकि सच ये है कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देता. बल्कि खुद नीतीश ही रिजाइन करते हैं. अब वे बिहार चलाने के लायक नहीं रह गए हैं. मुख्यमंत्री का पद संवैधानिक है और इसकी गरिमा होती है. 14 करोड़ लोगों का भविष्य उनके हाथ में है. इसलिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.’!